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पुनर्वसु नक्षत्र: विवाह मिलान

27 नक्षत्रों में पुनर्वसु 7वाँ नक्षत्र है; इसका स्वामी गुरु है। पुनर्वसु नक्षत्र में जन्मे लोग देव गण, मार्जार योनि, आदि नाड़ी और उदर (नाभि) रज्जु के होते हैं।

नक्षत्र स्वामीगुरु
राशि (चरण)मिथुन 1–3, कर्क 4
गणदेव
योनिमार्जार
नाड़ीआदि
रज्जुउदर (नाभि)

कन्या का नक्षत्र पुनर्वसु हो तो — सबसे अच्छे मिलान

वर का नक्षत्र10 पोरुथम36 गुण (अष्टकूट)रज्जु
स्वाती7.5/1027/36✓
मृगशिरा6.5/1031.5/36✓
रोहिणी6.5/1022.5/36✓
पूर्वाषाढ़ा6/1027/36✓
उत्तरा भाद्रपद6/1027/36✓
श्रवण6/1024/36✓
चित्रा6/1019.5/36✓
रेवती5.5/1026.5/36✓
भरणी5.5/1026/36✓
मघा5.5/1022.5/36✓

वर का नक्षत्र पुनर्वसु हो तो — सबसे अच्छे मिलान

कन्या का नक्षत्र10 पोरुथम36 गुण (अष्टकूट)रज्जु
स्वाती7.5/1027/36✓
श्रवण6.5/1023/36✓
पूर्वाषाढ़ा6/1027/36✓
पूर्वा फाल्गुनी6/1026.5/36✓
आर्द्रा6/1026/36✓
रेवती6/1025.5/36✓
रोहिणी6/1022.5/36✓
मघा6/1021.5/36✓
चित्रा6/1019.5/36✓
मृगशिरा5.5/1031.5/36✓

ध्यान से देखें (रज्जु / वेध / नाड़ी दोष)

अश्विनीकृत्तिकापुनर्वसुउत्तरा फाल्गुनीहस्तविशाखाज्येष्ठामूलउत्तराषाढ़ाशतभिषापूर्वा भाद्रपद

ये अंक हर नक्षत्र के मध्य चरण से निकाले गए हैं। राशि पर आधारित कूट चरण के अनुसार बदल सकते हैं — सटीक परिणाम के लिए दोनों का जन्म विवरण डालकर मिलान करें।

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27 नक्षत्र

अश्विनीभरणीकृत्तिकारोहिणीमृगशिराआर्द्रापुनर्वसुपुष्यआश्लेषामघापूर्वा फाल्गुनीउत्तरा फाल्गुनीहस्तचित्रास्वातीविशाखाअनुराधाज्येष्ठामूलपूर्वाषाढ़ाउत्तराषाढ़ाश्रवणधनिष्ठाशतभिषापूर्वा भाद्रपदउत्तरा भाद्रपदरेवती